हमारे प्राचीन ऋषियों ने सदियों पहले एक अद्भुत सत्य की खोज की थी— ‘यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे’। इसका अर्थ है कि जिस प्रकार यह विशाल ब्रह्मांड पांच तत्वों (पंचमहाभूतों) से बना है, ठीक उसी प्रकार हमारा शरीर भी उन्हीं तत्वों से निर्मित है।
विप्र वास्तु (Vipra Vastu) में हमारा मानना है कि एक आनंदमय, शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारे शरीर के तत्वों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच संतुलन होना अनिवार्य है। जाने-माने वास्तु सलाहकार श्री महेश सारस्वत के अनुसार, “वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ मानव जीवन का सामंजस्य स्थापित करने की कला है।”
जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो मनुष्य को स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार इन 5 तत्वों (Panchamahabhutas) का हमारे घर और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

1. पृथ्वी तत्व (Earth Element) – स्थिरता का प्रतीक
पृथ्वी तत्व का हमारे जीवन में सबसे गहरा प्रभाव है। वैज्ञानिक रूप से भी यह सिद्ध है कि पृथ्वी एक विशाल चुम्बकीय पिण्ड है, जिसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। हमारे शरीर में मौजूद लौह तत्व (Iron) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित होता है।
श्री महेश सारस्वत सुझाव देते हैं:
सोने की सही दिशा: पृथ्वी के चुंबकीय प्रभाव के कारण हमेशा दक्षिण (South) की ओर सिर करके सोना चाहिए। इससे शरीर को ब्रह्मांडीय ऊर्जा मिलती है और नींद गहरी आती है, जिससे आप सुबह तरोताजा महसूस करते हैं।
भूखंड का चयन: घर बनाते समय भूमि का आकार, ढलान और मिट्टी की गुणवत्ता की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। पृथ्वी तत्व ही एकमात्र ऐसा तत्व है जो हमारी सभी पांचों इंद्रियों पर असर डालता है।
2. जल तत्व (Water Element) – स्पष्टता और स्वास्थ्य
पृथ्वी के बाद जल सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। मानव शरीर का 70% और पृथ्वी का दो-तिहाई भाग जल है। वास्तु शास्त्र में जल तत्व का सही स्थान पर होना धन और स्वास्थ्य के प्रवाह को सुनिश्चित करता है।
विप्र वास्तु के महत्वपूर्ण टिप्स:
जल का स्थान: स्वच्छ और मीठा पानी (जैसे बोरिंग, कुआं या भूमिगत टंकी) हमेशा ईशान कोण (North-East) में होना चाहिए।
निकासी व्यवस्था: घर से पानी की निकासी, सीवर और सेप्टिक टैंक की दिशा का सही निर्धारण करना चाहिए ताकि घर की सकारात्मक ऊर्जा दूषित न हो।
3. अग्नि तत्व (Fire Element) – ऊर्जा और आत्मशक्ति
सूर्य अग्नि तत्व का मुख्य स्रोत है और ब्रह्मांड की आत्मा है। सूर्य की किरणें हमारे जीवन की शक्ति हैं। श्री महेश सारस्वत बताते हैं कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य की ऊर्जा बदलती रहती है, और घर की बनावट उसी अनुसार होनी चाहिए।
सकारात्मक ऊर्जा (Morning Sun): सुबह की सूर्य किरणें (UV rays) स्वास्थ्य के लिए संजीवनी हैं। घर किसी भी दिशा में खुले लेकिन भवन का पूर्व (East) और ईशान (North-East) भाग नीचा और खुला होना चाहिए ताकि ये शुभ किरणें घर में प्रवेश कर सकें।
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: दोपहर और शाम को सूर्य प्रकाश से बचने के लिए घर की दक्षिण (South) और पश्चिम (West) दिशा में खुले स्थान जैसे खिड़की इत्यादि ना हो, ऊंचे निर्माण इसमें अवरोधक का काम करते है।
4. वायु तत्व (Air Element) – गति और प्राण
वायु जीवन के लिए अनिवार्य है। इसका सीधा संबंध हमारी स्पर्श और श्रवण शक्ति से है। घर में ऑक्सीजन का सही प्रवाह और तापमान का संतुलन वायु तत्व पर निर्भर करता है।
वेंटिलेशन: घर में खिड़कियां, दरवाजे और रोशनदान सही दिशा में होने चाहिए ताकि ताजी हवा का प्रवाह बना रहे।
पेड़-पौधे: घर के आसपास सही दिशा में लगाए गए सही पेड़-पौधे वायु तत्व को संतुलित करने में मदद करते हैं।
5. आकाश तत्व (Space Element) – विस्तार और मानसिक शांति
आधुनिक वास्तुकला में अक्सर आकाश तत्व की अनदेखी की जाती है, लेकिन विप्र वास्तु में इसे सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। आकाश अनंत है और इसका संबंध हमारी सुनने की शक्ति (शब्द गुण) से है, मानसिक शांति से है, जिसे संतुलित रखना अत्यंत आवश्यक है।
ब्रह्मस्थान (Brahmasthan): ऊर्जा का केंद्र :
घर का मध्य भाग ब्रह्मस्थान है। ब्रह्मस्थान का दोषरहित होना सबसे जरुरी है। यहाँ से सभी ऊर्जा का संतुलन होता है। सीढ़िया, टॉयलेट जैसे दोष इस क्षेत्र में रहने से परेशानियां घेर लेती है।
अव्यवस्था से बचें:
घर में अनावश्यक निर्माण या बेकार सामान का जमावड़ा आकाश तत्व को दूषित करता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। जितना आवश्यक हो, उतना ही निर्माण करें। बेकार के सामान, टूटे फूटे सामान को घर से हटाए।
निष्कर्ष: विप्र वास्तु के साथ जीवन को संतुलित करें:
आजकल हम प्राकृतिक प्रकाश और पंचतत्वों के संतुलन को भूल, घरों की आंतरिक साज-सज्जा (Interior Decoration) पर लाखों खर्च करते हैं। वास्तु विशेषज्ञ श्री महेश सारस्वत का कहना है कि “महंगे फर्नीचर से कहीं अधिक मूल्यवान वह साधारण खिड़की है जो सही दिशा में बनी हो और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती हो।”
विप्र वास्तु (Vipra Vastu) का उद्देश्य आपके मकान को केवल पत्थर-ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि एक सुसंस्कृत, शांत और समृद्धि से भरा ‘घर’ बनाना है। पंचमहाभूतों के सही संतुलन से आप अपने परिवार के लिए एक हर्षपूर्ण और सफल जीवन सुनिश्चित कर सकते हैं।
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