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वास्तु की 8 दिशाएँ और उनका महत्व | Vipra Vastu – Mahesh Saraswat

क्या आप जानते हैं कि आपके घर की हर दिशा आपके जीवन के अलग-अलग पहलुओं को प्रभावित करती है?
भारतीय वास्तु शास्त्र केवल भवन निर्माण की कला नहीं, बल्कि यह प्रकृति की ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं (Cosmic Energies) और पंचतत्व – जल, पृथ्वी, अग्नि, वायु और आकाश के संतुलन पर आधारित एक वैज्ञानिक व्यवस्था है।

अक्सर देखा जाता है कि कड़ी मेहनत के बावजूद जीवन में अपेक्षित सफलता नहीं मिलती या घर में बार-बार स्वास्थ्य, धन अथवा मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याएँ बनी रहती हैं। इसका एक प्रमुख कारण वास्तु दोष या दिशाओं का असंतुलन भी हो सकता है।
इसलिए आवश्यक है कि घर की सभी दिशाएँ संतुलित और वास्तु अनुसार हों, ताकि नकारात्मक प्रभाव जीवन में प्रवेश न कर सकें।

आज के इस लेख में Vipra Vastu के प्रमुख वास्तु सलाहकार एवं वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत आपको विस्तार से बताएंगे कि वास्तु की 8 दिशाओं का क्या महत्व है और किस दिशा में कौन-सा निर्माण आपके लिए शुभ और फलदायी होता है।

Vastu Directions in Hindi
Vastu Directions in Hindi

1. पूर्व दिशा (East Direction Vastu)

पूर्व दिशा से सूर्य का उदय होता है, इसलिए इसे ऊर्जा, स्वास्थ्य और नए आरंभ की दिशा माना गया है। इस दिशा के देवता इंद्र हैं।

वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत के अनुसार,
घर या ऑफिस का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में होना अत्यंत शुभ होता है। सुबह की सूर्य किरणें घर में प्रवेश कर नकारात्मक ऊर्जा और सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट करती हैं, जिससे वातावरण सकारात्मक बना रहता है।

👉 इस दिशा को खुला रखना चाहिए।
👉 यहाँ स्नानघर या मीटिंग एरिया बनाना भी शुभ माना जाता है।


2. उत्तर दिशा (North Direction Vastu)

उत्तर दिशा के स्वामी धन के देवता कुबेर हैं। यह दिशा धन, करियर, व्यापार और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी होती है।

👉 इस दिशा में प्रवेश द्वार, लिविंग रूम या ऑफिस का रिसेप्शन होना शुभ माना जाता है।
👉 वास्तु नियमों के अनुसार, इस भाग को हल्का और खुला रखना चाहिए, जिससे धन के नए अवसर निरंतर आते रहें।


3. उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) – सबसे शुभ दिशा (North East Direction Vastu)

ईशान कोण को वास्तु शास्त्र में सर्वोत्तम दिशा कहा गया है। इसके देवता भगवान शिव हैं। यह दिशा ज्ञान, विचार, आध्यात्म और शुद्ध ऊर्जा से संबंधित होती है।

👉 यहाँ पूजा स्थल, ध्यान कक्ष या जल स्रोत बनाना अत्यंत शुभ होता है।
👉 अंडरग्राउंड पानी की टंकी के लिए भी यह सर्वोत्तम स्थान है।

वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत के अनुसार,
ईशान कोण में शौचालय किसी भी परिस्थिति में नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यह घर की सकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह बाधित कर रोग और मानसिक अशांति को जन्म देता है। यदि पहले से बना हो, तो तुरंत योग्य वास्तु सलाहकार से समाधान लें।


4. पश्चिम दिशा (West Direction Vastu)

पश्चिम दिशा के अधिष्ठाता देवता वरुण हैं। यह दिशा धन लाभ, इच्छाशक्ति और स्थिरता को प्रभावित करती है।

👉 इस दिशा में बेडरूम, बाथरूम या स्टोर रूम बनाना उपयुक्त माना जाता है।
👉 स्टोर रूम में कूड़ा-कबाड़ इकट्ठा न करें, क्योंकि वास्तु में स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है।


5. उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) (North West Direction Vastu)

वायव्य कोण के देवता वायु हैं। यह दिशा गतिशीलता, परिवर्तन और मानसिकता से जुड़ी होती है।

👉 यह दिशा बैंकिंग, लीगल मामलों और आवागमन को प्रभावित करती है।
👉 यहाँ गेस्ट रूम, बाथरूम या स्टोर बनाना शुभ माना जाता है।


6. दक्षिण दिशा (South Direction Vastu)

दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज माने जाते हैं और यह दिशा पितरों, यश और सुरक्षा से संबंधित होती है।

👉 इस दिशा में बेडरूम बनाया जा सकता है।
👉 इसे अन्य दिशाओं की तुलना में भारी और बंद रखना चाहिए।

वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत के अनुसार,
दक्षिण दिशा का मजबूत और भारी होना घर को स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है।


7. दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) – स्थायित्व की दिशा (South West Direction Vastu)

नैऋत्य कोण के देवता नैऋत्य हैं। यह दिशा स्थायी धन, पारिवारिक सामंजस्य और नियंत्रण शक्ति से जुड़ी होती है।

👉 यहाँ गृहस्वामी का शयनकक्ष, तिजोरी या भारी अलमारी रखना अत्यंत शुभ होता है।
👉 यह दिशा जीवन में स्थिरता और अधिकार प्रदान करती है।


8. दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) – अग्नि का स्थान (South East Direction Vastu)

आग्नेय कोण के स्वामी अग्निदेव हैं। यह दिशा ऊर्जा, पाचन शक्ति, स्वास्थ्य और कैश फ्लो को प्रभावित करती है।

👉 इसी कारण रसोईघर (Kitchen) के लिए यह दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है।


निष्कर्ष – Vipra Vastu की विशेष सलाह

Vipra Vastu के वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत के अनुसार,
वास्तु कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि प्रकृति के नियमों पर आधारित एक वैज्ञानिक प्रणाली है।

 FAQs :

Que: वास्तु में कुल कितनी दिशाएँ होती हैं?

Ans: वास्तु शास्त्र में कुल 8 प्रमुख दिशाएँ मानी जाती हैं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम।


Que: घर के लिए सबसे शुभ दिशा कौन सी होती है?

Ans: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को वास्तु में सबसे शुभ माना गया है। यहाँ पूजा स्थल और जल स्रोत बनाना अत्यंत फलदायी होता है।


Que: रसोईघर किस दिशा में होना चाहिए?

Ans: वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) रसोईघर के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।


Que: धन और करियर के लिए कौन सी दिशा महत्वपूर्ण है?

Ans: उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर से संबंधित होती है और यह आर्थिक उन्नति व करियर ग्रोथ को प्रभावित करती है।


Que: ईशान कोण में शौचालय क्यों अशुभ माना जाता है?

Ans: ईशान कोण सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। यहाँ शौचालय होने से स्वास्थ्य, मानसिक शांति और समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


Que: क्या वास्तु दोष जीवन में समस्याएँ पैदा करता है?

Ans: हाँ, वास्तु दोष के कारण धन हानि, रोग, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह हो सकती है। सही दिशा संतुलन से इन समस्याओं से बचा जा सकता है।


Que: Vipra Vastu से वास्तु परामर्श क्यों लें?

Ans: Vipra Vastu के प्रमुख सलाहकार वास्तु विशेषज्ञ महेश सारस्वत वैज्ञानिक और व्यावहारिक वास्तु समाधान प्रदान करते हैं, जो बिना तोड़-फोड़ के भी प्रभावी होते हैं।

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